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निर्यात
निरीक्षण
परिषद के
विषय में परिचय गुणता
नियंत्रण और
निरीक्षण और
इससे
संबंधित
मामलों के
माध्यम से
भारत के
निर्यात व्यापार
का सशक्त
विकास
सुनिश्चित
करने के लिए
भारत सरकार
द्वारा
निर्यात (गुणता
नियंत्रण और
निरीक्षण)
अधिनियम, 1963 (1963
का 22) की धारा 3
के तहत
भारतीय
निर्यात
निरीक्षण
परिषद (निनिप)
की स्थापना
की गई थी। निनिप
केंद्रीय
सरकार का एक
सलाहकार
निकाय है,
जिसे
अधिनियम के
तहत निम्नलिखित
के लिए
अधिकार
प्राप्त है
: 4
मदों
को अधिसूचित
करना, जिनका
गुणता
नियंत्रण और/या
निरीक्षण
उसके
निर्यात के
पहले किया
जाएगा, 4
उक्त
अधिसूचित मदों
के लिए मानकों
की स्थापना,
और 4
उक्त
मदों पर लागू
होने वाले
गुणता
नियंत्रण और/या
निरीक्षण का
प्रकार
निर्दिष्ट
करना। अपनी
सलाहकार
भूमिका के
अलावा
निर्यात
निरीक्षण
परिषद वाणिज्य
मंत्रालय,
भारत सरकार
द्वारा स्थापित
चेन्नै, दिल्ली,
कोच्चि,
कोलकाता,
मुंबई स्थित
निर्यात
निरीक्षण
अभिकरण पर
तकनीकी और
प्रशासनिक
नियंत्रण का
कार्य
भारतीय
निर्यात
निरीक्षण
परिषद द्वारा
तैयार किए गए
विभिन्न
साधनों और
नीतियों के
कार्यान्वयन
के प्रयोजन
हेतु करती
है। निर्यात
निरीक्षण
परिषद् निम्नलिखित
क्षेत्रों
में निर्यात
निरीक्षण
अभिकरण, इसके
क्षेत्र
संगठनों के
माध्यम से
प्रत्यक्ष
या अप्रत्यक्ष
रूप से सेवाएं
प्रदान करता
है : गुणता आश्वासन
प्रणालियों (प्रक्रियाधीन
गुणता
नियंत्रण और
स्व-प्रमाणीकरण)
की संस्थापना
के ज़रिए
निर्यातक
इकाइयों और
परेषणवार
निरीक्षण
में निर्यात
वस्तुओं की
गुणता का
प्रमाणन। खाद्य
प्रक्रमण
इकाइयों में
खाद्य
सुरक्षा
प्रबंध
प्रणाली की
संस्थापना
के माध्यम
से निर्यात
के लिए खाद्य
मदों की गुणता
का प्रमाणन। निर्यात उत्पादों
की विभिन्न
अधिमानी
टेरिफ
योजनाओं के
तहत
निर्यातकों
को उद्भव
प्रमाणपत्र
जारी करना। संगठनात्मक
व्यवस्था केंद्रीय
सरकार द्वारा
गठित
निर्यात
गुणता
नियंत्रण और
निरीक्षण
अधिनियम, 1963 के
तहत परिषद्
को अपने
कार्यों के
निर्वहन में
सहायता के
लिए
विशेषज्ञ
समितियों के
गठन का
अधिकार है।
इसके अनुसार
परिषद ने
प्रशासनिक
मामलों पर
सलाह देने के
लिए
प्रशासनिक
समिति और
तकनीकी मामलों
पर सलाह देने
के लिए एक
तकनीकी समिति
का गठन किया
है। इसके
अलावा, इसने
निम्नलिखित
विशिष्ट
तकनीकी
क्षेत्रों
में कुछ स्थायी
समितियों का
गठन किया है : परिषद
के सदस्यों
की सूची :
निर्यात
(गुणता
नियंत्रण और
निरीक्षण)
नियम, 1964 के साथ
पठित
निर्यात (गुणता
नियंत्रण और
निरीक्षण)
अधिनियम, 1963 की
धारा 3 के
अनुसार
केंद्रीय
सरकार ने
आधिकारिक
राजपत्र में
दिनांक 31
मार्च, 2000 को
अपनी
अधिसूचना सं.
एस.ओ. 322 (ई) के
ज़रिए दो
वर्ष की अवधि
के लिए
निर्यात
निरीक्षण
परिषद का
पुनर्गठन
किया है :
हमारी
संकल्पना एक साखपूर्ण
और सक्षम
निरीक्षण तथा
प्रमाणन
प्रणाली के
माध्यम से
भारतीय
निर्यातकों
को विश्वव्यापी
पहुंच
प्रदान करना
तथा प्रमाणन
गुणता के लिए
भारत के
अग्रणी
संगठन के रूप
में वैश्विक
मान्यता
अर्जित करना। हमारा
अभियान
हमारी
सेवाएं निर्यात
निरीक्षण
परिषद् निम्नलिखित
क्षेत्रों
में निर्यात
निरीक्षण
अभिकरणों,
इसके
क्षेत्र
संगठनों के
माध्यम से
प्रत्यक्ष
या अप्रत्यक्ष
रूप से सेवाएं
प्रदान करता
है :
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